विदेशों से लौटेगा भारतीय टैलेंट, तभी भारत बनेगा टेक्नोलॉजी का ग्लोबल लीडर: राजनाथ सिंह

 

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भारतीय टैलेंट और शिक्षा जगत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज लाखों भारतीय छात्र, शोधकर्ता, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज़ और संस्थानों में काम कर रहे हैं। लेकिन अगर भविष्य में अन्य देशों में इमिग्रेशन (Immigration) का माहौल कठिन होता है, तो भारत को चाहिए कि इस टैलेंट को वापस लाने की रणनीति बनाए।

भारतीय प्रतिभा को घर लौटने का माहौल बनाना होगा: Rajnath Singh

राजनाथ सिंह ने कहा—

“हमें अपनी यूनिवर्सिटीज़, IITs, IIMs, IISERs, R&D लैब्स, कंपनियों और थिंक टैंक्स में ऐसे अवसर और अकादमिक स्वतंत्रता देनी होगी, ताकि यह टैलेंट भारत आकर योगदान दे।”

उन्होंने विशेष रूप से देश के वाइस चांसलर्स, डीन और प्रोफेसर्स से अपील करते हुए कहा कि अब वक्त है कि हम स्ट्रक्चरल चेंजेज और इंसेंटिव्स पर विचार करें। ताकि विदेशों में काम कर रहे भारतीय शोधकर्ता और विशेषज्ञ, अगर वहां किसी तरह की दिक्कत झेलते हैं, तो वे किसी दूसरे देश में जाने की बजाय भारत लौटें।

Innovation Ecosystem को मिलेगा बूस्ट

रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि अगर विदेशी धरती पर फैला भारतीय टैलेंट अपने देश लौटकर काम करेगा, तो रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) सेक्टर को एक सडन बूस्ट मिलेगा। इससे भारत का इनोवेशन इकोसिस्टम मजबूत होगा और देश नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगा।

भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी कंज्यूमर नहीं, क्रिएटर भी बनेगा

राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा दौर चुनौतियों से घबराने का नहीं बल्कि उन्हें अवसर के रूप में देखने का है।

“अगर हम सब मिलकर सही दिशा में काम करें, तो आने वाले सालों में भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी का कंज्यूमर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी क्रिएटर और इस सेक्टर का ग्लोबल लीडर बन सकता है।”

Indian Economy की तेज रफ्तार में सबको जुड़ना होगा

भारत की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने इसे रैपिड रेल से तुलना की। उन्होंने कहा—

“Indian economy की जिस रैपिड रेल के हम सब सहयात्री हैं, उसके अगले स्टेशन Growth, Prosperity और Happiness हैं। दरवाजे दोनों तरफ खुलेंगे। इसलिए यह सही समय है, भारत की इस इकोनॉमिक जर्नी से जुड़ने का।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इन बयानों का सीधा संदेश यह है कि भारत को अब सिर्फ टैलेंट सप्लायर बने रहने की बजाय टैलेंट रिटर्न पर भी फोकस करना होगा। अगर सरकार, यूनिवर्सिटीज़ और इंडस्ट्री मिलकर उपयुक्त माहौल तैयार करें, तो आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ग्लोबल इनोवेशन हब भी बन सकता है।

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