दिल्ली शराब नीति से जुड़े सीबीआई (CBI) मामले में आज एक बेहद अनोखा नज़ारा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने किसी वकील को खड़ा करने के बजाय खुद अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस केस की सुनवाई से हटने (Recusal) की मांग की। केजरीवाल ने एक-एक कर वे 10 कारण गिनाए, जिनकी वजह से उनके मन में अदालत की निष्पक्षता को लेकर ‘शंका’ पैदा हुई है।
1. 5 मिनट में पलट दिया गया 40,000 पन्नों का फैसला
केजरीवाल ने कहा कि 9 मार्च को कोर्ट ने सिर्फ 5 मिनट की सुनवाई के बाद निचली अदालत के आदेश को ‘गलत’ करार दे दिया। उन्होंने दलील दी कि जिस आदेश को निचली अदालत ने 40,000 पन्नों के दस्तावेज़ पढ़ने और लंबी सुनवाई के बाद दिया था, उसे इतनी जल्दी बिना उनका पक्ष सुने स्टे कर दिया गया।
2. “मेरा दिल बैठ गया था”
केजरीवाल ने कोर्ट से सीधे तौर पर कहा कि जब उन्होंने 9 मार्च का आदेश देखा, तो उनका दिल बैठ गया। उन्हें लगा कि शायद उन्हें इस अदालत से निष्पक्ष न्याय नहीं मिलेगा। इसी डर की वजह से उन्होंने पहले चीफ जस्टिस को पत्र लिखा और अब यह अर्जी लगाई है।
3. विचारधारा का मुद्दा (Ideological Conflict)
केजरीवाल ने एक गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ के कार्यक्रमों में 4 बार शामिल हुई हैं। उन्होंने कहा, “आप जिस संगठन के कार्यक्रम में गईं, हम उस विचारधारा के सख्त खिलाफ हैं। ऐसे में मेरे मन में शंका है कि क्या मुझे न्याय मिल पाएगा?”
4. “मुझे लगभग दोषी घोषित कर दिया गया”
केजरीवाल ने जज साहिबा के पिछले फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि संजय सिंह, के. कविता और उनकी खुद की गिरफ्तारी वाले मामले में कोर्ट की टिप्पणियां ऐसी थीं जैसे उन्हें पहले ही ‘महा-भ्रष्ट’ और ‘दोषी’ मान लिया गया हो।
5. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
केजरीवाल ने ‘रंजीत ठाकुर’ और ‘सत्येंद्र जैन’ केस का उदाहरण देते हुए कहा कि कानून कहता है कि यह जरूरी नहीं कि जज वास्तव में पक्षपाती हो, बल्कि अगर ‘वादी’ (Litigant) के मन में पक्षपात की थोड़ी भी शंका है, तो जज को केस से हट जाना चाहिए।
6. जांच एजेंसियों के प्रति ‘उदार’ रुख
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लग रहा है जैसे सीबीआई और ईडी जो भी कहती हैं, कोर्ट उसे बिना सवाल किए मान लेता है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों की हर प्रार्थना को कोर्ट ‘फैसले’ में बदल देता है।
7. केस की असामान्य रफ्तार
केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जिस रफ्तार से उनके और विपक्षी नेताओं के केस चल रहे हैं, वैसी तेजी किसी और केस में नहीं दिखती। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित होने की आशंका का आधार बताया।
8. नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन
उन्होंने कहा कि कई मौकों पर उन्हें अपना जवाब दाखिल करने या अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। 9 मार्च का आदेश भी बिना उनका पक्ष सुने (Ex-parte) पास कर दिया गया था।
9. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी
केजरीवाल ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि ‘डिस्चार्ज’ (बरी होने) के आदेश पर बिना ठोस कारण के स्टे नहीं लगाना चाहिए, लेकिन इस कोर्ट ने उनकी रिहाई पर रोक लगा दी।
10. अदालत की भाषा और टिप्पणियां
केजरीवाल ने कहा कि कोर्ट के आदेशों में इस्तेमाल की गई भाषा, जैसे कि “आरोपी ने खुद पेश न होने का विकल्प चुना”, उनके प्रति कड़ा रुख दिखाती है, जबकि मामला सालों से चल रहा है और वे हमेशा सहयोग कर रहे हैं।
कोर्ट रूम का आखिरी पल: “आप वकील भी बन सकते हैं”
पूरी बहस के बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की तारीफ करते हुए कहा, “आपने बहुत अच्छी बहस की, आप वकील भी बन सकते हैं।” इस पर केजरीवाल ने मुस्कुराते हुए कहा, “शुक्रिया मैम, पर मैं अभी जो काम कर रहा हूँ, उसी में खुश हूँ।”
जज साहिबा ने कहा कि वह इन सभी दलीलों पर विचार कर अपना फैसला सुनाएंगी।

