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‘विकसित भारत’ के नाम पर गरीबों की थाली पर हमला: भगवंत मान ने केंद्र के खिलाफ खोला मोर्चा

"पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मनरेगा और केंद्र के नए कानून के खिलाफ भाषण देते मुख्यमंत्री भगवंत मान।"

पंजाब की राजनीति में मंगलवार को उस समय उबाल आ गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) के स्थान पर लाए गए नए कानून ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ को दलित और गरीब विरोधी करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में इस नए कानून के खिलाफ एक प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया। मुख्यमंत्री ने सीधे शब्दों में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ‘पंजाब-विरोधी सिंड्रोम’ से ग्रसित है और पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए गरीबों के मुँह से निवाला छीन रही है।

मनरेगा का खात्मा: रोजगार की संवैधानिक गारंटी पर संकट

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा वर्षों के विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई ‘मनरेगा’ योजना महज एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए रोजगार की एक संवैधानिक गारंटी थी। उन्होंने कहा-

“केंद्र ने कुछ ही घंटों में संसद में ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ कानून पारित कर मनरेगा की मूल आत्मा को ही कुचल दिया है। यह मांग-आधारित योजना को मानकों के जाल में फंसाकर मजदूरों के अधिकार छीनने की साजिश है।”

मान ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पंजाब में मनरेगा के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 60 प्रतिशत महिलाएं हैं। नए बदलावों से सीधे तौर पर समाज का सबसे पिछड़ा और वंचित वर्ग प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि रोजगार के अवसर कम होने से इन वर्गों की आर्थिक स्थिति बदतर हो जाएगी और उनकी गरिमा पर चोट पहुंचेगी।

“चहेते उद्योगपतियों” का विकास बनाम गरीबों का विनाश

केंद्र सरकार के ‘विश्वगुरु’ और ‘विकसित भारत’ के विजन पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार अपने चहेते उद्योगपति मित्रों के लाखों-करोड़ों के कर्ज माफ कर रही है और उन्हें भारी सब्सिडी दे रही है, वहीं दूसरी ओर गरीबों के भोजन का अधिकार छीना जा रहा है।

“क्या गरीबों से रोटी और काम की गारंटी छीनकर भारत ‘विश्वगुरु’ बनेगा? जब प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं भी उद्योगपति मित्रों के हित में तय होती हों, तब दिल्ली के वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे लोग पंजाब के गांवों की जमीनी हकीकत को कभी नहीं समझ सकते।”

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

भाजपा का ‘पंजाब-विरोधी सिंड्रोम’ और सहयोगियों की चुप्पी

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर पंजाब के साथ लगातार सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब विश्वविद्यालय और भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र का हर कदम पंजाब के अधिकारों को लूटने के लिए होता है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर भाजपा की यही मनमानी चलती रही, तो वे राष्ट्रगान से भी ‘पंजाब’ का नाम हटाने में संकोच नहीं करेंगे।

अकाली दल पर प्रहार करते हुए मान ने कहा कि इस “पाप” में शिरोमणि अकाली दल भी बराबर का भागीदार है। आगामी चुनावों में गठबंधन की लालसा के कारण अकाली नेतृत्व भाजपा की इन जन-विरोधी नीतियों पर मौन साधे हुए है। उन्होंने कहा कि पंजाब के भाजपा नेता भी राज्य के प्रति वफादार होने के बजाय अपने केंद्रीय आकाओं की जी-हजूरी में लगे हैं।

कांग्रेस की ‘गरीब-विरोधी’ मानसिकता पर कटाक्ष

सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बहस से भागने की प्रवृत्ति भाजपा के साथ उसकी मिलीभगत को उजागर करती है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा सहित अन्य नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल मीडिया में बने रहने के लिए सस्ती राजनीति कर रहे हैं, जबकि असल मुद्दों पर उनका रुख स्पष्ट नहीं है।

पंजाब सरकार का संकल्प: ‘ए-टीम’ बनकर करेंगे मुकाबला

भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार “जनता की ए-टीम” है और गरीबों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगी। उन्होंने अपनी सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के वकीलों को आरक्षण देने और फ्लाइंग स्कूलों में आरक्षित सीटों जैसे कदमों को गिनाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी दलितों और मजदूरों की आवाज को प्रधानमंत्री तक पहुँचाएगी।

पंजाब विधानसभा में पारित यह प्रस्ताव केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का एक नया अध्याय है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि पंजाब सरकार केंद्र की ‘नापाक मंशा’ को सफल नहीं होने देगी और इस नए कानून का पुरजोर तरीके से विरोध करेगी।

 

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