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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) क्या है? जानें इसका इतिहास और महत्व

Strait of Hormuz in Hindi

Strait of Hormuz in Hindi | वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति की बिसात पर कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जिनकी अहमियत किसी भी देश की सीमा से कहीं बढ़कर होती है। इन्हीं में से एक है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)। यह संकरा सा दिखने वाला समुद्री रास्ता दुनिया की ‘ऊर्जा नस’ (Energy Vein) कहलाता है। आखिर क्यों यह जलमार्ग इतना खास है और कैसे पड़ा इसका यह अनोखा नाम? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)?

भौगोलिक दृष्टि से देखें तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक जलडमरूमध्य है जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान स्थित है और दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तथा ओमान का एक हिस्सा (मुसंदन प्रायद्वीप) है।

इसकी चौड़ाई सबसे संकरे बिंदु पर मात्र 33 किलोमीटर (21 मील) है। हालांकि, जहाजों के आने-जाने के लिए सुरक्षित लेन (Shipping Lane) इससे भी संकरी है, जो लगभग 3 किलोमीटर चौड़ी है।

दुनिया की ‘ऊर्जा नस’ क्यों है यह?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोक पॉइंट’ माना जाता है। इसकी अहमियत को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

कैसे मिला इसे ‘होर्मुज’ नाम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नाम को लेकर इतिहासकारों के बीच दो प्रमुख सिद्धांत प्रचलित हैं:

1. प्राचीन बंदरगाह ‘होर्मुज’ और पारसी मूल:

सबसे प्रचलित सिद्धांत के अनुसार, इसका नाम ‘होर्मुज’ नाम के प्राचीन शहर और बंदरगाह के नाम पर पड़ा है। यह बंदरगाह 10वीं से 17वीं शताब्दी के बीच व्यापार का एक बहुत बड़ा केंद्र था। भाषाई रूप से, ‘होर्मुज’ शब्द फारसी देवता ‘अहुरा मजदा’ (Ahura Mazda) के नाम का अपभ्रंश माना जाता है। स्थानीय भाषा में इसे ‘ओरमुज’ भी कहा जाता था।

2. पुर्तगाली प्रभाव:

एक अन्य सिद्धांत के अनुसार, 16वीं शताब्दी में जब इस क्षेत्र पर पुर्तगालियों का नियंत्रण था, तब उन्होंने इस स्थान के आर्थिक महत्व को देखते हुए इसे ‘Hormuz’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों पर दर्ज किया।

इतिहास और संघर्ष का केंद्र

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सदियों से संघर्षों का गवाह रहा है। प्राचीन सिल्क रोड का हिस्सा होने के नाते इस पर कब्जे को लेकर हमेशा होड़ रही है:

भू-राजनीतिक महत्व (Geopolitical Significance)

ईरान के लिए यह जलमार्ग एक ‘हथियार’ की तरह है। चूंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का अधिकांश उत्तरी हिस्सा ईरान के समुद्री क्षेत्र में आता है, इसलिए वह यहां होने वाली हलचल पर कड़ी नजर रखता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश यहां अपनी नौसेना की उपस्थिति बनाए रखते हैं ताकि तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से चलती रहे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महज एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता का एक पैमाना है। इसके नाम के पीछे की कहानी जितनी पुरानी है, इसकी वर्तमान प्रासंगिकता उतनी ही आधुनिक और जटिल है। जब तक दुनिया ऊर्जा के लिए जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भर है, तब तक नक्शे पर यह संकरा सा दिखने वाला रास्ता दुनिया की महाशक्तियों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बना रहेगा।

Author

  • Pooja Chaudhary is a digital journalist with a diploma in journalism and background experience leading communications at Salaam Baalak Trust NGO. She specializes in writing on social issues, politics, and sports.

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