प्रधानमंत्री ओमान में, नेता विपक्ष जर्मनी में, दिल्ली प्रदूषण में: केजरीवाल

Arvind Kejriwal on Delhi Pollution | आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के गंभीर प्रदूषण संकट पर केंद्र सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ओमान में हैं, नेता विपक्ष जर्मनी में हैं और देश की राजधानी दमघोंटू प्रदूषण से जूझ रही है। दिल्ली गैस चैंबर बन चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार पूरी तरह खामोश है।

केंद्र की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल

केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की सक्रिय भूमिका के बिना दिल्ली में प्रदूषण कम नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री की ओर से अब तक प्रदूषण पर एक शब्द भी नहीं कहा गया। जब देश की राजधानी सांस लेने लायक न बचे और नेतृत्व मौन रहे, तो हालात सुधरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

पंजाब साफ, दिल्ली में ‘अपना’ प्रदूषण

चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता के दौरान केजरीवाल ने पराली के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पंजाब के सभी शहरों का एक्यूआई 70 से 100 के बीच है। कहीं धुआं नहीं है। पराली नहीं जलाई जा रही। ऐसे में दिल्ली का प्रदूषण बाहरी नहीं, पूरी तरह स्थानीय है।

10 साल में कभी नहीं देखे ऐसे हालात

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में 10 साल तक आम आदमी पार्टी की सरकार रही, लेकिन दिसंबर में कभी इतना गंभीर प्रदूषण नहीं रहा। आज हालात कहीं ज्यादा खतरनाक हैं, जो सरकार की नाकामी को दिखाते हैं।

AQI में खेल, हकीकत और खतरनाक

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार वास्तविक स्थिति छिपा रही है। मॉनिटरिंग स्टेशनों के आसपास पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके बावजूद एक्यूआई 450 पार कर रहा है। वास्तविक एक्यूआई 700 से 800 के बीच है।

GRAP-4 सिर्फ कागजों पर

केजरीवाल ने कहा कि लंबे समय तक ग्रैप-4 लागू नहीं किया गया। जब हालात बेहद खराब हो गए, तब औपचारिक रूप से इसे लागू किया गया। इसके बाद भी दिल्ली में खुलेआम निर्माण कार्य चल रहा है। ग्रैप-4 जमीन पर नहीं, सिर्फ फाइलों में है।

‘आप’ सरकार के समय त्वरित कार्रवाई

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई होती थी। निरीक्षण टीमें बनती थीं। कूड़ा और आग जलाने पर सख्ती से रोक लगती थी। यही वजह थी कि हालात नियंत्रण में रहते थे।

बीजिंग ने किया, दिल्ली क्यों नहीं?

केजरीवाल ने बीजिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि एक दशक पहले वहां का प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर था। सरकार ने नीयत दिखाई और ठोस फैसले लिए। नतीजा साफ हवा के रूप में सामने आया। दिल्ली और केंद्र सरकार में ऐसी इच्छाशक्ति नजर नहीं आती।

देश की राजधानी बेबस, नेतृत्व विदेश में

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ओमान में हैं, नेता विपक्ष जर्मनी में हैं और दिल्ली दमघोंटू हवा में जीने को मजबूर है। जब शीर्ष नेतृत्व को चिंता ही नहीं होगी, तो राजधानी की हवा साफ कैसे होगी।

Author

  • पूजा

    Pooja Chaudhary is a digital journalist with a diploma in journalism and background experience leading communications at Salaam Baalak Trust NGO. She specializes in writing on social issues, politics, and sports.


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