कर्नाटक धर्मस्थल केस: शिकायतकर्ता ही गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला

दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक), 23 अगस्त: कर्नाटक के बहुचर्चित धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले (Dharmasthala Mass Burial Case) में बड़ा मोड़ सामने आया है। बेल्थांगडी कोर्ट ने शनिवार को इस मामले के शिकायतकर्ता को 10 दिन की एसआईटी (Special Investigation Team) हिरासत में भेज दिया है। एसआईटी इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

गृह मंत्री जी. परमेश्वर का बयान

कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने मीडिया से बातचीत में शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी की पुष्टि की। उन्होंने कहा—

“यह सही है कि शिकायतकर्ता को गिरफ्तार किया गया है और वह पुलिस हिरासत में है। फिलहाल जांच चल रही है, इसलिए अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती। एसआईटी अधिकारी मामले की तहकीकात कर रहे हैं। किस तरह का नेटवर्क इसके पीछे सक्रिय है, यह जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा।”

विपक्ष का हमला: “मंदिरों को बदनाम करने की साजिश”

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और भाजपा एमएलसी चलवाड़ी नारायणस्वामी ने इस गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ी साजिश है जिसका मकसद हिंदू मंदिरों को बदनाम करना है।

नारायणस्वामी ने कहा—

“मुख्य षड्यंत्रकारी, नकाबपोश व्यक्ति चिन्नैया का चेहरा अब उजागर हो चुका है। एसआईटी ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित साजिश है। इन लोगों का मकसद हिंदू मंदिरों की छवि खराब करना था। कांग्रेस सरकार पर भी संदेह है कि वह इस साजिश में शामिल है। जो भी लोग इस मामले में ब्लैकमेलिंग की साजिश रच रहे हैं, उन सभी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”

कब बनी एसआईटी?

इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक सरकार ने इस पूरे विवाद की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। मामला कथित तौर पर सामूहिक हत्या, सामूहिक बलात्कार और सामूहिक दफन जैसी गंभीर घटनाओं से जुड़ा हुआ है, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी।

कर्नाटक धर्मस्थल केस क्या है?

4 जुलाई 2025 को धर्मस्थल के एक पूर्व सफाईकर्मी ने दक्षिण कन्नड़ पुलिस के एसपी को एक खत लिखा।
खत में शिकायतकर्ता ने दावा किया कि धर्मस्थल में लड़कियों का रेप और हत्या कर सैकड़ों लाशें दफनाई गईं।
11 जुलाई 2025 को शिकायतकर्ता ने दक्षिण कन्नड़ के बेल्थांगडी कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया।
19 जुलाई 2025 को कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई।
13 अगस्त 2025 को धर्मस्थल की अलग-अलग 13 साइट्स पर खुदाई हुई, यहां से कुछ इंसानी हड्डियां मिलीं।
23 अगस्त 2025 को SIT ने शिकायत करने वाले धर्मस्थल के पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया।

धर्मस्थल केसः शिकायतकर्ता ने क्या कहा था?

शिकायतकर्ता का दावा है कि वह 1998 से 2014 के बीच मंदिर में काम करता था। लेकिन वह इस मामले को लेकर अब सामने इसलिए आया है, क्योंकि उसे पछतावा है और पीड़ितों को न्याय दिलाने की भावना उसे चैन से जीने नहीं दे रही है। उसने दावा कियाः

1998 में धर्मस्थल के सुपरवाइजर ने पहली बार मुझे लाशों को चुपचाप ठिकाने लगाने को कहा था। जब मैंने इनकार किया तो मुझे बेरहमी से पीटा गया और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। साल 2014 में मेरी नाबालिग रिश्तेदार के साथ भी यौन उत्पीड़न हुआ, जिसके बाद मैं परिवार समेत धर्मस्थल से भाग गया और गुमनाम पहचान के साथ दूसरे राज्य में रहने लगा।

धर्मस्थल सामूहिक दफन प्रकरण अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। एक ओर सरकार दावा कर रही है कि एसआईटी साजिश का पर्दाफाश करेगी, वहीं विपक्ष इसे हिंदू मंदिरों को बदनाम करने की कोशिश बता रहा है। शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी के बाद जांच नए मोड़ पर पहुंच गई है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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