EX MP Pension | संसद और राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित सवालों में से एक यह है कि सांसदों को हर महीने कितनी सैलरी और भत्ते मिलते हैं, और पूर्व सांसदों को हर महीने कितनी पेंशन मिलती है? आम जनता के बीच यह मुद्दा अकसर बहस का विषय बन जाता है।
ताज़ा नियमों और हालिया संशोधनों के आधार पर आइए जानते हैं सांसदों की पूरी सैलरी स्ट्रक्चर, यात्रा और आवास की सुविधाएँ, और पूर्व सांसदों की पेंशन से जुड़ी जानकारी।
सांसदों की मौजूदा सैलरी और भत्ते
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मूल वेतन (Basic Salary):
लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को हर महीने ₹1,24,000 सैलरी मिलती है। -
डेली अलाउंस (Daily Allowance):
संसद या समिति की बैठक में उपस्थित रहने पर सांसद को ₹2,500 प्रति दिन का भत्ता मिलता है। -
कांस्टीट्यूएंसी अलाउंस (क्षेत्रीय भत्ता):
अपने संसदीय क्षेत्र में काम करने और स्थानीय दफ़्तर चलाने के लिए सांसदों को ₹87,000 प्रति माह दिया जाता है। -
ऑफिस एक्सपेंस अलाउंस (Office Expenses):
इसके लिए सांसद को ₹75,000 प्रति माह मिलता है। इसमें से ₹50,000 स्टाफ सैलरी और ₹25,000 स्टेशनरी/डाक खर्च के लिए होता है।
सांसदों को मिलने वाली अतिरिक्त सुविधाएं
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आवास (Housing):
दिल्ली में हर सांसद को बिना किराया दिए आधिकारिक आवास मिलता है, जिसमें फर्नीचर और रखरखाव की सुविधा भी शामिल है। -
हवाई यात्रा (Air Travel):
हर साल सांसद और उनके परिवार के लिए 34 मुफ्त घरेलू हवाई यात्राएँ उपलब्ध हैं। इनमें से 8 यात्राएँ उनकी पत्नी/पति अकेले भी कर सकते हैं। -
रेल यात्रा (Rail Travel):
सांसद और उनकी पत्नी को देशभर में फ़र्स्ट क्लास एसी/एग्जीक्यूटिव क्लास में असीमित मुफ्त रेल यात्रा की सुविधा है। -
संचार सुविधा (Communication Allowance):
सांसदों को फ़ोन और इंटरनेट बिल के लिए उदार रिइम्बर्समेंट मिलता है, जिसमें लाखों रुपये तक के मुफ्त कॉल और डेटा उपयोग शामिल हो सकते हैं।
पूर्व सांसद को हर महीने कितनी पेंशन मिलती है? (ex mp pension)
- 2025 में सरकार ने सांसदों की पेंशन और भत्तों में 24% की बढ़ोतरी की है।
- अब पूर्व सांसदों को ₹31,000 प्रति माह पेंशन मिलती है।
- यदि कोई सांसद पाँच साल से अधिक कार्यकाल पूरा करता है, तो हर अतिरिक्त वर्ष पर ₹2,500 प्रति माह अतिरिक्त पेंशन जोड़ी जाती है।
- उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सांसद 10 साल तक संसद में रहा है, तो उसे न्यूनतम ₹31,000 + ₹12,500 (5 साल अतिरिक्त) = ₹43,500 पेंशन प्रति माह मिलेगी।
राजनीति सेवा है तो पेंशन क्यों?
सोचिए अगर आपको सिर्फ पाँच साल नौकरी करने के बाद ज़िंदगीभर पेंशन मिलने लगे, तो कैसा होगा? सुनने में यह सपना लगता है, लेकिन भारत में सांसदों के लिए यह हकीकत है।
दरअसल, सांसदों के लिए संसद ने अलग से पेंशन नियम बनाए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति सांसद बनता है और न्यूनतम पाँच साल का कार्यकाल पूरा करता है, वह पेंशन का हकदार हो जाता है। भले ही वह चुनाव हार जाए या राजनीति से संन्यास ले ले, सरकारी खजाने से हर महीने पेंशन आती रहेगी।
यहीं पर असली सवाल खड़ा होता है। एक तरफ़ आम सरकारी कर्मचारियों को अब NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) पर डाल दिया गया है, जहाँ पेंशन की गारंटी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ़ सांसदों को सिर्फ पाँच साल सांसद रहने पर ही पक्की और आजीवन पेंशन मिलती है।
क्या यह वाकई न्यायसंगत है? यही वजह है कि यह मुद्दा अक्सर जनता और सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बनता है।
सांसदों की पेंशन पर जनता की आपत्ति क्यों?
- कम अवधि, ज़िंदगीभर फायदा: सिर्फ पाँच साल सांसद रहना और पूरी उम्र सरकारी खजाने से पेंशन लेना जनता को चुभता है।
- करोड़ों टैक्सपेयर्स पर बोझ: यह रकम अंततः जनता के टैक्स से ही निकलती है।
- NPS बनाम सांसद पेंशन: जब आम आदमी को अपनी रिटायरमेंट सिक्योरिटी के लिए निवेश और रिस्क लेना पड़ता है, तो सांसदों के लिए इतनी आसानी क्यों?
क्या पेंशन पूरी तरह गलत है?
सांसदों की पेंशन को लेकर हमेशा से ही जनता के बीच से सवाल उठते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस छिड़ी रहती है। लेकिन आइए समझते हैं कि पूर्व सांसदों के लिए पेंशन व्यवस्था क्यों जरूरी है?
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ज़रूरत क्यों है?
सांसदों को वित्तीय सुरक्षा देना ज़रूरी है, ताकि राजनीति केवल धनवानों का करियर न बन जाए। अगर प्रतिनिधियों को पेंशन या बेसिक आर्थिक सुरक्षा न मिले तो लोकतंत्र की विविधता पर असर पड़ सकता है। -
सुधार की ज़रूरत:
- पेंशन को कॉन्ट्रिब्यूटरी सिस्टम (सांसद और सरकार दोनों का अंशदान) बनाया जाए।
- एक कार्यकाल पर सिर्फ “सेवरेंस पैकेज” मिले, और लंबे कार्यकाल पर ही पेंशन की सुविधा हो।
- पेंशन और भत्तों की पूरी जानकारी पब्लिक डैशबोर्ड पर हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सांसदों की सैलरी और भत्ते केवल उनकी जेब भरने के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र और संसदीय कामकाज के खर्च के लिए भी बनाए गए हैं। वहीं, पूर्व सांसदों की पेंशन का सिद्धांत यह है कि सार्वजनिक जीवन छोड़ने के बाद भी उन्हें न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा मिले। लेकिन, वर्तमान दौर में यह बहस सही है कि सांसदों की पेंशन को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और कॉन्ट्रिब्यूटरी बनाना ज़रूरी है।
FAQs – पूर्व सांसद की पेंशन और भत्ते
Q.1. पूर्व सांसद को न्यूनतम पेंशन कितनी मिलती है?
👉 पूर्व सांसद को न्यूनतम ₹31,000 प्रतिमाह पेंशन दी जाती है।
Q.2. अगर कोई सांसद 10 साल तक संसद में रहा हो तो उसे कितनी पेंशन मिलेगी?
👉 10 साल सांसद रहने पर ₹31,000 के साथ हर अतिरिक्त कार्यकाल के ₹2,500 जुड़कर कुल ₹43,500 प्रतिमाह पेंशन मिलती है।
Q.3. सांसद रहते हुए कितनी सैलरी मिलती है?
👉 सांसद की बेसिक सैलरी ₹1,24,000 प्रतिमाह होती है। इसके अलावा क्षेत्रीय खर्च, ऑफिस खर्च और डेली अलाउंस भी मिलते हैं।
Q.4. क्या पूर्व सांसदों की पेंशन उनके परिवार को भी मिलती है?
👉 हाँ, कई मामलों में सांसद की मृत्यु के बाद उनके परिवार को भी पेंशन मिलती रहती है।
Q.5. क्या सांसदों को मुफ्त हवाई और रेल यात्रा की सुविधा मिलती है?
👉 हाँ, सांसदों को हर साल 34 मुफ्त घरेलू हवाई यात्रा और देशभर में अनलिमिटेड फर्स्ट क्लास रेल यात्रा का अधिकार होता है।
Q.6. सांसदों की पेंशन पर विवाद क्यों होता है?
👉 विवाद इसलिए होता है क्योंकि आम कर्मचारियों को लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी निश्चित पेंशन नहीं मिलती, जबकि सांसद सिर्फ पाँच साल सेवा करके जीवनभर पेंशन पाने के हकदार हो जाते हैं।
Q.7. क्या सांसदों की पेंशन व्यवस्था में बदलाव संभव है?
👉 विशेषज्ञ मानते हैं कि पेंशन को कॉन्ट्रिब्यूटरी मॉडल बनाना चाहिए और लंबे कार्यकाल वालों को ही पेंशन मिलनी चाहिए।
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