देश में अब ‘शिक्षा क्रांति’ की सख्त जरूरत, बाजार में बिक रहा बच्चों का भविष्य: मनीष सिसोदिया

नई दिल्ली | दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प का नेतृत्व करने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया रविवार को जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने वहां शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार लाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे युवाओं और छात्रों का हौसला बढ़ाया। सिसोदिया ने केंद्र सरकार की नीतियों और वर्तमान परीक्षा प्रणाली पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि आज देश को एक बड़े पैमाने पर ‘शिक्षा क्रांति’ की सख्त जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्रांति की सबसे पहली और अपरिहार्य शर्त देश को ‘पेपर माफिया’ के चंगुल से पूर्ण आजादी दिलाना है।

सिसोदिया ने वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “आज का कड़वा सच यह है कि देश में सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र नहीं बिक रहे, बल्कि हम सबके बच्चों का भविष्य खुले बाजार में नीलाम हो रहा है। यह एक निर्णायक लड़ाई है जो यह तय करेगी कि भविष्य में इस देश में कड़ी मेहनत करने वाला एक साधारण छात्र आगे बढ़ेगा या फिर पैसे और ऊंची पहुंच के दम पर पेपर खरीदने वाला अपराधी।”

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते मनीष सिसोदिया

सोनम वांगचुक की नजरबंदी को बताया ‘सफेद चादर का जादू’

पूर्व शिक्षा मंत्री ने प्रमुख शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का विशेष रूप से उल्लेख किया, जो पिछले कई दिनों से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने अपना शरीर दांव पर लगाकर देश में शिक्षा सुधारों का बीड़ा उठाया है, लेकिन सरकार उनके आंदोलन से डर गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि शनिवार को प्रधानमंत्री ने अपने लोगों को भेजकर जंतर-मंतर पर ‘सफेद चादर वाला जादू’ दिखाया। जिस तरह बचपन में जादूगर चादर के पीछे से इंसान को गायब कर देते हैं, ठीक उसी तरह वांगचुक को अवैध तरीके से स्टेज से हटाकर अस्पताल भेजते हुए नजरबंद कर दिया गया।

सिसोदिया ने चुटकी लेते हुए कहा, “काश! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यही सफेद चादर वाला जादू केंद्रीय शिक्षा मंत्री की कुर्सी के सामने दिखाया होता, तो आज धर्मेंद्र प्रधान उस पद से गायब हो गए होते। मोदी जी को अगर यह गायब करने का जादू आता है, तो वे इसका प्रयोग अपनी सरकार के विफल मंत्रियों पर करें। सोनम वांगचुक को बलपूर्वक हटाने से यह आंदोलन खत्म नहीं होगा, बल्कि शनिवार सुबह के बाद से जंतर-मंतर पर युवाओं का आक्रोश और बढ़ गया है।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े

सिसोदिया ने देश की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली के विरोधाभास को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज में एक नियम है—बच्चे ने साल भर ठीक से पढ़ाई की या नहीं, इसे जांचने के लिए उसकी परीक्षा होती है। वहीं दूसरी ओर, परीक्षा ठीक से आयोजित कराई गई या नहीं, यह सरकार की योग्यता की परीक्षा होती है।

उन्होंने कहा, “जब एक छात्र किसी परीक्षा में फेल हो जाता है, तो उसे अगली कक्षा में जाने की अनुमति नहीं होती, उसका दाखिला रोक दिया जाता है। लेकिन मोदी जी की व्यवस्था में विरोधाभास देखिए; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पूरे देश की प्रतिष्ठित परीक्षाएं सुचारू रूप से कराने में पूरी तरह फेल साबित हुए हैं, फिर भी वे अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं। जनता चाहती है कि वे तत्काल इस्तीफा दें। अगर बच्चों के फेल होने पर पढ़ाई रुक सकती है, तो मंत्री के फेल होने पर कुर्सी क्यों नहीं छोड़ी जा सकती? यह देश के नौनिहालों के साथ सरासर नाइंसाफी है।”

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसद मार्च का आह्वान

आंदोलन की व्यापकता को रेखांकित करते हुए सिसोदिया ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन भले ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के बैनर तले हो रहा हो और इसमें विभिन्न विचारधाराओं के लोग शामिल हों, लेकिन मूल रूप से यह देश के भविष्य को बचाने का आंदोलन है। उन्होंने इस आंदोलन को अपने कंधों पर उठाने वाले युवा नेताओं—अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरभ दास और देश की अन्य बेटियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और आज के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा जैसे गंभीर विषय पर भी देशव्यापी क्रांति खड़ी की जा सकती है।

मनीष सिसोदिया ने देश के सभी नागरिकों और सभी राजनीतिक दलों के समर्थकों से अपील की कि वे सोमवार, 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जमीनी कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा, “यह लड़ाई सिर्फ आम आदमी पार्टी, कांग्रेस या समाजवादी पार्टी की नहीं है। भाजपा के कार्यकर्ताओं के बच्चे भी इन्हीं स्कूलों और व्यवस्था में पढ़ते हैं। सोमवार सुबह राजनीति को भूलकर अपने घर में सो रहे बच्चे का चेहरा देखें और कसम खाकर जंतर-मंतर पहुंचें। अपने बच्चों के हक के लिए संसद का घेराव करें और अक्षम शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बुलंद करें।”

सिसोदिया ने अंत में संकल्प दोहराया कि वे खुद सोमवार को इस ऐतिहासिक युवा मार्च का हिस्सा बनेंगे और छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संसद की ओर कूच करेंगे।

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