Ram Mandir Land Scam | आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने अयोध्या श्री राम मंदिर जमीन खरीद में हुए कथित करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़े पुख्ता सबूत विशेष जांच टीम (SIT) को सौंप दिए हैं। लखनऊ स्थित कार्यालय में एसआईटी अध्यक्ष और लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत के बुलावे पर पहुंचे संजय सिंह ने जमीन सौदों से संबंधित कुल 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा किए। इस कथित घोटाले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, “श्री राम मंदिर के चढ़ावे में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही एसआईटी को हमारे सांसद संजय सिंह ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जमीन घोटाले के सारे अकाट्य सबूत सौंप दिए हैं। हमारी मांग है कि इस पवित्र स्थान के नाम पर हुई धोखाधड़ी की निष्पक्ष जांच हो।”
‘प्रभु श्री राम ही जानें आगे क्या होगी कार्यवाही’
एसआईटी को दस्तावेज सौंपने के तुरंत बाद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “जमीन खरीद के नाम पर ट्रस्ट ने करोड़ों रुपये का घोटाला किया। मैंने सारे दस्तावेज एसआईटी को सौंप दिए हैं। आगे क्या कार्यवाही होगी, यह प्रभु श्री राम ही जानें।”
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता के मन में इस घोटाले को लेकर भारी आक्रोश है, क्योंकि आस्था के नाम पर दिए गए चंदे और चढ़ावे की चोरी ने करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है।
5 मिनट में 9 गुना मुनाफा और नजूल जमीन का हेरफेर
संजय सिंह ने बताया कि उनके पास कुल 13 दस्तावेज थे, जिनमें से दो मामले आपस में जुड़े होने के कारण उन्होंने 11 सेट कागज एसआईटी अध्यक्ष और एक अन्य सदस्य को सौंपे हैं। इन दस्तावेजों में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं:
- नजूल की जमीन का सौदा: गाटा संख्या 247 की ₹2.92 करोड़ की सरकारी (नजूल) जमीन को ट्रस्ट ने ₹24 करोड़ में खरीदा। एसडीएम अयोध्या ने लिखित में दिया है कि यह नजूल भूमि है, जिसे न बेचा जा सकता है और न खरीदा जा सकता है। चंपत राय द्वारा इसे खरीदा जाना सीधे-सीधे चंदे की डकैती है।
- बाजार दर से हजार गुना महंगी खरीद: यूपी सरकार ने इसी क्षेत्र में किसानों से ₹4.40 लाख प्रति बिस्वा की दर से अत्यंत उपयोगी जमीन खरीदी, जबकि चंपत राय ने आलोक बंसल नामक व्यक्ति से ₹47 लाख प्रति बिस्वा की दर से जमीन खरीदी।
- 5 मिनट में मुनाफा: साल 2021 में सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से जो जमीन ₹2 करोड़ में खरीदी, उसे महज 5 मिनट बाद ही ₹18.5 करोड़ में ट्रस्ट को बेच दिया गया।
SIT को सौंपे गए मुख्य दस्तावेजों का ब्यौरा:
- दस्तावेज 1: 18 मार्च 2021 को ₹4.97 करोड़ की जमीन ट्रस्ट ने ₹8 करोड़ में खरीदी। इसमें गवाह ट्रस्ट सदस्य अनिल कुमार मिश्रा और तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय थे।
- दस्तावेज 2 और 3: सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी का ₹2 करोड़ का सौदा, जो 5 मिनट बाद ₹18.5 करोड़ में ट्रस्ट को ट्रांसफर हुआ। इसमें भी ऋषिकेश उपाध्याय और अनिल मिश्रा गवाह थे।
- दस्तावेज 4: 20 फरवरी को ₹41.60 लाख की सरकारी मूल्य वाली जमीन ₹2 करोड़ में बेची गई।
- दस्तावेज 5 & 5-A: तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण ने ₹20 लाख में जमीन खरीदी और 7 महीने बाद ₹2.5 करोड़ में चंपत राय को बेच दी।
- दस्तावेज 6 & 6-A: 14 मई 2020 को दीप नारायण को दान में मिली जमीन को उसने चंपत राय को ₹1 करोड़ में बेचा।
- दस्तावेज 7: 20 मई 2021 को चंपत राय ने बृजमोहन दास से ₹92.50 लाख की जमीन ₹5.60 करोड़ में खरीदी।
- दस्तावेज 8 और 9: गाटा संख्या 153 और 82 वाली ₹45.24 लाख की जमीनों के कागजात गायब हैं और इन्हें कितने में बेचा गया, यह बड़ी जांच का विषय है।
- दस्तावेज 10 और 11: नजूल की जमीन का ₹24 करोड़ का सौदा और 16 नवंबर 2023 को ₹9 करोड़ की जमीन को ₹55 करोड़ 47 लाख में खरीदने के पुख्ता प्रमाण।
“ट्रस्ट के पैसों पर सीधी डकैती”
संजय सिंह ने कहा, “धार्मिक कार्यों और प्रभु श्री राम के मंदिर के लिए लोग अपनी गाढ़ी कमाई दान करते हैं, कई लोग जमीनें मुफ्त या सस्ते दामों पर देते हैं। लेकिन यहाँ राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आपदा को अवसर बनाकर हजारों गुना महंगी जमीनें खरीदीं। यह सीधे-सीधे चंदे की चोरी है। एसआईटी अध्यक्ष ने हमें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।”
संजय सिंह ने मीडिया जगत से भी अपील की कि वे अयोध्या में तीरथ क्षेत्र और होटलों के आसपास की इन जमीनों का खुद ऑन-ग्राउंड मुआयना करें ताकि इस महाघोटाले की जमीनी हकीकत देश के सामने पूरी तरह साफ हो सके। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि एसआईटी बिना किसी राजनीतिक दबाव के इन 11 दस्तावेजों के आधार पर दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

