उत्तर प्रदेश की सियासत में विकास की उपलब्धियां हमेशा बहस का मुद्दा रही हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि साल 2017 में जब उन्होंने उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली थी, तब तक प्रदेश के किसी भी शहर में मेट्रो नहीं चलती थी।
उनके मुताबिक आज 6 शहरों में मेट्रो परिचालित है, एयरपोर्ट्स की संख्या 2 से बढ़कर 16 हो चुकी है और देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर में बनने जा रहा है। योगी ने कहा, “आज उत्तर प्रदेश के पास देश का सबसे बेहतरीन नेशनल हाइवे नेटवर्क है।”
अखिलेश का पलटवार – “इतना बड़ा झूठ कि खुद झूठ भी शर्मा जाए”
सीएम योगी के इस बयान पर सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा-
“आज तो झूठ भी अपने आप को लज्जित महसूस कर रहा होगा। इतना बड़ा झूठ भी नहीं बोलना चाहिए कि इंसान औरों की ही नहीं, अपनी निगाह में भी गिर जाए।”
अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता के लिए जनता को गुमराह करती है और इतने बड़े झूठ बोलती है कि पद की गरिमा भी कम हो जाती है। उन्होंने कहा-
“ऐसे महाझूठ वक्ता अपने लोगों को महामूर्ख समझते हैं। भाजपा और उनके संगी-साथियों की यही सोच है कि झूठ बोलकर अपने लोगों को ठगो।”
लेकिन सच क्या है?
दोनों के दावे तो आपने पढ़ लिए। आइए अब तथ्यों पर नज़र डालने से पहले कुछ पुराने ट्वीट्स देख लेते हैं। पहला ट्वीट उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हैंडल से किया गया है। 1 दिसंबर 2016 को ट्विटर पर शेयर की गई तस्वीरों के साथ अखिलेश ने लिखा है, “लखनऊ मेट्रो के ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाई। हम उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए आवागमन को आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

दूसरा ट्वीट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के हैंडल से किया गया है। 1 सितंबर 2017 को किए गए इस ट्वीट में लिखा है, “पांच सितंबर से लखनऊ में मेट्रो चालू हो जाएगी।”

साफ है कि अखिलेश यादव ने 1 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री रहते हुए लखनऊ मेट्रो के ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाई थी। बाद में 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बने और 5 सितंबर 2017 को लखनऊ मेट्रो का उद्घाटन हुआ और 6 सितंबर 2017 को इसे यात्रियों के लिए खोल दिया गया
- लखनऊ मेट्रो का निर्माण: 27 सितंबर 2014 को अखिलेश सरकार के दौरान शुरू हुआ।
- पहला संचालन: 5 सितंबर 2017 को 8.5 किमी लंबे ट्रांसपोर्ट नगर–चारबाग़ कॉरिडोर पर हुआ। उस समय योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री थे।
- पूर्ण संचालन: 9 मार्च 2019 को रेड लाइन (सीसीएस एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया) पूरी तरह चालू हुई।
- आज लखनऊ, कानपुर, आगरा, नोएडा-ग्रेटर नोएडा और मेरठ में मेट्रो/आरआरटीएस परिचालित है।
यानी सच यह है कि लखनऊ मेट्रो के निर्माण की शुरूआत अखिलेश सरकार के कार्यकाल में ही हो चुकी थी। बाद में योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद लखनऊ मेट्रो ऑपरेशनल हुई और इसका विस्तार भी हुआ।
सियासी मायने क्या हैं?
यह विवाद बताता है कि उत्तर प्रदेश में विकास के दावे केवल आंकड़ों की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव बनाने का ज़रिया भी हैं। योगी आदित्यनाथ जहां 2017 के बाद की उपलब्धियों पर ज़ोर दे रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव खुद को मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का जनक बताकर भाजपा के दावों को झूठा साबित करना चाहते हैं।
यह पूरी बहस अब जनता पर छोड़ती है कि वे किसे सच मानें- योगी का दावा या अखिलेश की चुनौती।
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