इंटरनेशनल ट्रेड शो में छाया सिद्धार्थ नगर का काला नमक चावल, जानिए क्यों है स्पेशल?

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में काला नमक चावल के बारे में जानकारी देते दीनानाथ जी।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में चल रहे UP इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में इस बार एक खास स्टॉल चर्चा का केंद्र बना- काला नमक चावल (Buddha Rice)। सिद्धार्थ नगर से आए दीनानाथ जी ने यहां अपनी संस्था ‘सोशल अलायंस फॉर बैलेंसिंग इनइक्विलिटी’ के माध्यम से दुनिया के सामने इस धरोहर को पेश किया।

काला नमक चावल के फायदे

काला नमक चावल को आमतौर पर सुगंधित और पोषक तत्वों से भरपूर पारंपरिक धान की किस्म माना जाता है। यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र (खासतौर पर सिद्धार्थ नगर) में सदियों से उगाई जा रही है।

दीनानाथ जी बताते हैं कि यह धान सदियों से सिद्धार्थ नगर और आसपास के जिलों—गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, महराजगंज और संतकबीर नगर—में उगाया जाता रहा है और इसे बुद्धा राइस भी कहा जाता है।

इंटरनेशनल ट्रेड शो में काला नमक चावल के बारे में जानकारी देते दीनानाथ।

दीनानाथ जी और उनकी संस्था

सिद्धार्थ नगर के रहने वाले दीनानाथ जी वर्षों से काला नमक चावल की खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

इंटरनेशनल ट्रेड शो में उन्होंने विभिन्न खरीदारों और डेलीगेट्स को काला नमक चावल की खूबियों से परिचित कराया।

काला नमक चावल को ‘बुद्धा राइस’ क्यों कहते हैं?

काला नमक चावल को ‘बुद्धा राइस’ भी कहा जाता है। दीनानाथ जी ने इसके पीछे का ऐतिहासिक महत्व भी बताया। दीनानाथ जी ने बताया-

माना जाता है कि लगभग 600 ईसा पूर्व जब भगवान बुद्ध कपिलवस्तु और कुशीनगर के बीच भ्रमण करते थे, तब स्थानीय किसानों ने उन्हें इसी चावल से भोजन कराया था। तब से अब तक लोग काला नमक चावल को प्रसाद के रूप में भगवान बुद्ध को समर्पित करते हैं।

यही वजह है कि यह धान सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

काला नमक चावल का वैज्ञानिक महत्व

कृषि वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों जैसे ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) तथा एन. डी. यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, फैज़ाबाद ने इस चावल पर गहन अध्ययन किया है।

UP सरकार और ODOP प्रोग्राम की भूमिका

काला नमक चावल को आज जिस पहचान की जरूरत थी, उसमें उत्तर प्रदेश सरकार का ODOP (One District One Product) प्रोग्राम अहम साबित हुआ है।

दीनानाथ जी का कहना है कि बिना सरकार की इस पहल के काला नमक चावल को वैश्विक पहचान दिलाना मुश्किल होता।

इंटरनेशनल ट्रेड शो : वैश्विक मंच की ओर कदम

ग्रेटर नोएडा का UP इंटरनेशनल ट्रेड शो केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की कृषि और परंपरा को वैश्विक बाजार से जोड़ने का माध्यम है।

काला नमक चावल भारत की एक अनोखी धरोहर है, जिसे आज वैश्विक पहचान मिल रही है। दीनानाथ जी और उनकी संस्था इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, UP सरकार का ODOP प्रोग्राम और इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंच इस विरासत को नए आयाम दे रहे हैं।

यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में काला नमक चावल न केवल किसानों की आर्थिक रीढ़ बनेगा, बल्कि भारत को हेल्दी और ऑर्गेनिक फूड मार्केट में एक वैश्विक नेतृत्व दिलाने में भी मदद करेगा।

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